बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा,

नारद विचोले कहर ढाया गोरजा,

सिर ते जटावा वाला ताज सजाया है,

बेल दे बेठा कैसा बेस बनाया है,

तन ते लंधोटा गल साप लम्काए ने,

भूतओहदे बन के बाराती नाल आये ने,

चंगा तेरे मथे दाग लाया गोरजा,

बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा,

डमरू बजाके नही ओ बेल उते चढ़या,

दूजे हाथ विच ओहने त्रिशूल ओहने फडिया,

चंगा तेरे बाबुल ने टोया वर नही,

देख के उहनू तू जाना मर नही,

पिंडे ते सवा मॉल आया गोरजा,

बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा

दसा किवे कडया जलूस जंज दा,

नाले चकी फिरदा झोला भंग दा,

भुत ते चडेला सब नची जांदे,

घोट के भंग वर नु पिउँदै,

नाग वी फंकारे गल पाया गोरजा,

बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा

मढ़िया च बेंदा नि ऊ खुंडा गड के,

घोटी जावे भंग लागे बेठा आग दे,

बड़ा सारा नंदी गन बेल रखिया,

कोद्खालसे दे दिंदे सच दसिया,

नाले माथे चाँद नु सजाया गोरजा,

बुडा तेरा लढ़ा बना नही गोरजा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।