कन्हैंया तुम मत बनना भगवान

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया तुम मत बनना भगवान,

मैं भी बालक तु भी बालक,

मैं भी बालक तु भी बालक,

दोनों एक समान,

कन्हैंया तुम मत बनना भगवान

मुझे भी माता जन्म दियो है,

पिता दे रहो ज्ञान,

तू भी देवकी वासुदेव का,

तू भी देवकी वासुदेव का,

कहलाये संतान,

कन्हैंया तुम मत बनना भगवान

मैं भी चाहूँ सखा बनाने,

पर मैं हूँ अनजान,

कैसे तुझको ढूंढू मोहन,

कैसे तुझको ढूंढू मोहन,

दे मुझको पहचान.

कन्हैया तुम

मित्र सुदामा पुकार रहा है,

अब भी तेरा नाम,

इतना सुंदर मित्र मिला है,

इतना सुंदर मित्र मिला है,

कैसे उसको जान,

कन्हैंया तुम मत बनना भगवान।।

मात यशोदा सुना रही है,

अब भी लोरी तान,

आते रहो तुम प्यार लूटाने,

आते रहो तुम प्यार लूटाने,

करने जग कल्याण,

कन्हैया तुम मत बनना भगवान।।

कन्हैया तुम मत बनना भगवान,

मैं भी बालक तु भी बालक,

मैं भी बालक तु भी बालक,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।