जगदम्ब मेरी जगदम्ब मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

¤ भजन के शब्द ¤

जगदम्ब मेरी जगदम्ब मेरी ।

तू जो दया करदे, जग ही खुशी है ।

जो तू नहीं तो, दुनिया दुःखी है।।

जगदम्ब....

कलियुग में अब पाप बढ़ा, आ जाओ मइया ।

दुर्गा-काली का रूप धरो, कष्ट हरो मइया ।।

जब भी कष्ट पड़े हैं भक्तों पर, तू ही माँ सुनती है ।

जगदम्ब..

पापी हैं चहुँ ओर बसे, चिन्ता होती है ।

भक्त तुम्हारे दुःखी हैं माँ ! हिंसा होती है ।।

अब तो खून की होली होती है,तू क्यों नहीं सुनती है ।

जगदम्ब....

तेरी कृपा से माँ ! दुनिया ये चलती है ।

तेरी कृपा से ही, कलियाँ सब खिलती हैं ।।

जब जैसा चाहे हो जाए, माँ तू ही तो करती है ।

जगदम्ब....

कान्त गीत गाता है माँ ! प्रेम मिला है ।

जो भी वो करता है माँ ! तेरी लीला है ।।

लाखों दुःख होंगे इस जग में, पर माँ पल में हरती है ।

जगदम्ब....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।