किस बात की परवाह है गुरुदेव के दर पे

पारंपरिक
सूर्य देव भजन गुरुदेव भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

भजन के शब्द :-

किस बात की परवाह है, गुरुदेव के दर पे ।

जिसने भी सर झुकाया, श्री गुरुदेव के दर पे ।।

बस चाह है बलि जाऊँ मैं, अरविन्द से पद पे ।

दुःख दर्द मिट जाते हैं, जब हाथ हो सर पे ।।

किस बात की.....

नचाती खूब माया थी, अविद्या फाँस ले करके ।

सताती मोह निद्रा थी, अँधेरी रात बन करके ।।

तम अंध सब मिटा है, श्री गुरुदेव के दर पे ।

किस बात की परवाह है, गुरुदेव के दर पे ।।

कस्ती डगमगा रही थी, मझधार में मेरी ।

सहारा कुछ न दिखता था, टूटी पतवार थी मेरी ।।

गुरु माझी बनके आये, लाये नाव को तट पे ।

किस बात की परवाह है, गुरुदेव के दर पे ।।

दिवाकर बनके सद्गुरु मिल गये, अँधियार को हरने ।

उर में भक्ति की मणिदीप भरे, उजियार को करने ।।

पहुँचा दिया है कान्त को, श्रीकान्त के दर पे ।

किस बात की परवाह है, गुरुदेव के दर पे ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।