मईया तेरी चुनरी जब जब लहराती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मईया तेरी चुनरी जब जब लहराती है

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धुन- रातों को उठ उठ के

मईया, तेरी चुनरी, जब जब, लहराती है ॥

जब जब, लहराती है, जब जब, लहराती है ॥

भक्तों को, दीवाना कर ॥ ये नाच, नचाती है ॥

मईया, तेरी चुनरी, जब जब...

तारों, जड़ी चुनरी, माँ चम चम चमके है ॥

इस की, बूटी बूटी, में हीरा दमके है ॥

तूँ, ओढ़ दिखा दे माँ ॥ क्यों, इतना सताती है ॥

मईया, तेरी चुनरी, जब जब...

तुम ही, बनाती हो, तुम ही मिटाती हो ॥

आए, कोई तूफ़ान तो, तूँ सिंह चढ़ आती हो ॥

आँचल में, छुपा के तुम ॥ गोदी में, सुलाती हो ॥

मईया, तेरी चुनरी, जब जब...

पैरों में, हैं कांटे, बड़ी गहरी खाई है ॥

कैसे, बताऊँ माँ, बड़ी बिपदा आई है ॥

बिन, बोले ही माँ तूँ ॥ आँसू, पोंछ जाती है ॥

मईया, तेरी चुनरी, जब जब...

तेरी, लाल चुनरिया माँ, मेरे मन को भाती है ॥

जब, धूप लगी हो तो, यह छाँव बन जाती है ॥

भक्तों के, दिल का यह ॥ चैन चुराती है ॥

मईया, तेरी चुनरी, जब जब...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।