मेरे प्राणेश मन मोहन

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे प्राणेश मन मोहन तुम्हे ढूँढू कहाँ जाकर,

बड़ा बेचैन हूँ तुम बिन जरा देखो मुझे आकर,

मेरे प्राणेश मनमोहन तुम्हे ढूँढू कहाँ जाकर

तुम्हारी याद आते ही,झड़ी आंसू की लग जाती,

तू फिर फिर दिल में आता है की मर जाऊँ जहर खाकर,

मेरे प्राणेश मनमोहन.......

छिपे हो तुम कहाँ जाकर ना आते हो बुलाने से,

मजा क्या तुमको आता है,मुझे इस तौर तड़पा कर,

मेरे प्राणेश मनमोहन......

ना भूलूंगा कभी उपकार अपने उस हितैषी का,

जो करवा दे मुझे दर्शन कन्हैया को यहां लाकर,

मेरे प्राणेश मनमोहन.......

प्रार्थना ‘राम’ की तुमसे यही कर जोड़ विनती है,

प्रार्थना ‘राम’ की तुमसे,

यही कर जोड़ विनती है,

लिपट जाऊँ तुम्ही से मैं तुम्हे आनंद घन पाकर,

मेरे प्राणेश मनमोहन.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।