बेरी आली मात भीमेश्वरी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज़:- मेहंदीपुर मै बालाजी की)

बेरी आली मात भीमेश्वरी - कहै तनै दुनिया सारी

लाखों भगत तनै तारे मैया - इबकै सै मेरी बारी....

1) रोज रोज ना माँगू मैया - एकबै झोली भरदे तू

सारा कुनबा मौज करै माँ - इसा गुज़ारा कर दे तू

आज कोए इसा वर तू

खिल जा जीवन की फुलवारी....

2) कोठी बंगले ऊँचे दे दे - ऊँचे कारोबार री

लाल फरारी चाहे फोरचुनर - चाहे तू दे दे थार री

मेरी अर्ज़ी कर स्वीकार री

माँ तू जग की है महतारी....

3) मनै सुनी सै कुल की देवी - करै कदे भी निराश नहीं

अपने लाडले भगतां की माँ - कदे तोड़ती आस नहीं

तेरे बिना किसे पै विश्वास नहीं

कित हाथ फैलाऊँ रखवारी...

4) इन सब चीजां बिन सर ज्यागी पर - एक वादा करना होगा

याद करै जब शुभम लाड़ला - सिर पै हाथ धरना होगा

प्रिंस जैन कहै करना होगा

उपकार यो मैया प्यारी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।