इंद्रगढ़ की रानी ऊंचा महला की पटरानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इंद्रगढ़ की रानी, ऊंचा महला की पटरानी।

दोहा - इंद्रगढ़ बिजासना, मां बरवाड़ा में चौथ, ऊपर माल में जोगणिया, ओ मैया थारे जले अखड़ी जोत ।

इंद्रगढ़ की रानी, ऊंचा महला की पटरानी, थारो मंदिर प्यारो लागे मारी माई, थारो मंदिर प्यारो लागे जी।।

सातवीं सदी में देबा चारण के जन्मयाई, कलयुग में पर्चा देवे मारी माई, कलयुग में पर्चा देवे जी।।

गुरु कृपानाथ जी थाने मनावे, थे तो इंद्रगढ़ की डुंगरिया में, बसगई मारी माई जी, प्यारो प्यारो मंदिरयो।।

बिजासन मैया थारी ऊंची नीची पैडया, मैया चडयो न उत्तरयो जावे री, मासे चडयो न उत्तरयो जावे री।।

सातों बहना साथ मैया लारा लारा रेवे, भगता का दुखडा हर दिज्यो जे रे, भगता का दुखड़ा हर दिज्यो।।

ओ थाकी पेड़या पे मैया थाकी तो सवारी घूमे,

डर घणों लागे प्यारी मारी माई जी,

डर माने लागे जी।।

थाकी तो पेड़या पे मैया थाकों शेरू घूमे, भगता की रक्षा करज्यो मारी माई जी, मंदिरया में आया रे।।

राजस्थान में जन्मयाई, जिला बूंदी में रेहबाली, मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे, मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे।।

हेमन्त सैनी तो मैया भजन बनावे मैया, थारे चरणा को चाकर राखो मारी माई जी, चरणा को सेवक राखो जी।।

लेखक & गायक - हेमन्त सैनी इंदरगढ़। मो. 9511552408

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।