माँ क्यू हमको रुलाए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मा नौ दिन बनी दुल्हनिया , जिनकी सेवा में दुनिया -2

होके चली है तू विदा , हमको रही क्यु रुला

मां तू हमको रुलाए , क्यों हमको पराया बनाए

नवरात्रि में 9 दिन मैया , सारे रूप दिखाएं

कन्या बनकर घर-घर तू ही , कन्या भोजन खाए

आके फिर न जा , हाथ ना ऐसे छुड़ा

मां तू हमको रुलाए ,क्यों हमको पराया बनाए

रोते रोते भक्त तुम्हारे , तेरी करें विदाई

तेरी आरती करते मैया , आँख मेरी भर आई

लेना लकी को चुपा , और न ऐसे तड़पा

मां तू हमको रुलाए ,क्यों हमको पराया बनाए

मा नौ दिन बनी दुल्हनिया , जिनकी सेवा में दुनिया -2

होके चली है तू विदा , हमको रही क्यु रुला

मां तू हमको रुलाए , क्यों हमको पराया बनाए

Writer - Niranjan sen

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।