चामुंडा मैया का द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

(भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है)

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

(वो अपनी चामुंडा मैया का द्वार है )

तुलजा भवानी भी साथ हर बार है

(तुलजा भवानी भी साथ हर बार है )

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

खुशियों के रंग से तूने सजाया सपनों का शहर देवास है

(खुशियों के रंग से तूने सजाया सपनों का शहर देवास है )

ऊंचे पहाड़ों पर बैठी हो मैया कीरपा तेरी सबके पास है

(ऊंचे पहाड़ों पर बैठी हो मैया कीरपा तेरी सबके पास है )

मां शेरोवाली के ये दो अवतार है

(मां शेरोवाली के ये दो अवतार है)

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

बनते नहीं है गर काम तेरे मैया से कीरपा उधार ले

(बनते नहीं है गर काम तेरे मैया से कीरपा उधार ले)

किस्मत के संग में अब तो दीवाने तू अपना वक्त सुधार ले

(किस्मत के संग में अब तो दीवाने तू अपना वक्त सुधार ले)

मिलता रहे मां हमें तेरा प्यार है

(मिलता रहे मां हमें तेरा प्यार है)

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

चामुंडा रूप में अंबे भवानी तेरा बरोठा में वास है

(चामुंडा रूप में अंबे भवानी तेरा बरोठा में वास है)

तेरी शरण में है मोज सबकी तुझसे जुड़ी सबकी आस है

(तेरी शरण में है मोज सबकी तुझसे जुड़ी सबकी आस है )

सुनती सभी के मन की पुकार है

(सुनती सभी के मन की पुकार है )

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

अपनी ये मां है ममता की मूरत मैया का दिल बड़ा साफ है

(अपनी ये मां है ममता की मूरत मैया का दिल बड़ा साफ है)

रूठी नहीं है मैया किसी से भक्तों की भूल करे माफ है

(रूठी नहीं है मैया किसी से भक्तों की भूल करे माफ है)

साथ रहना मेरे तू मेरा परिवार है

(साथ रहना मेरे तू मेरा परिवार है)

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

(भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है)

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है

(वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है )

तुलजा भवानी भी साथ हर बार है

(तुलजा भवानी भी साथ हर बार है )

(भक्तों की .....

भक्तों की जीत है जहां दुखों की हार है

वह अपनी चामुंडा मैया का द्वार है )

लेखक:

जयंत सांखला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।