मेरे दाता के दरबार में

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दाता के दरबार में,

सब लोगो का खाता,

जो कोई जैसी करनी करता,

वैसा ही फल पाता,

क्या साधू क्या संत गृहस्थी,

क्या राजा क्या रानी,

प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है,

सबकी कर्म कहानी,

अन्तर्यामी अन्दर बैठा,

सबका हिसाब लगाता,

मेरे दाता के दरबार में.....

बड़े बड़े कानून प्रभू के,

बड़ी बड़ी मर्यादा,

किसी को कौड़ी कम नहीं मिलती,

मिले न पाई ज्यादा,

इसीलिए तो वह दुनियाँ का

जगतपति कहलाता,

मेरे दाता के दरबार में......

चले न उसके आगे रिश्वत,

चले नहीं चालाकी,

उसकी लेन देन की बन्दे,

रीति बड़ी है बाँकी,

समझदार तो चुप रहता है,

मूरख शोर मचाता,

मेरे दाता के दरबार में.....

उजली करनी करले बन्दे,

करम न करियो काला,

लाख आँख से देख रहा है,

तुझे देखने वाला,

उसकी तेज नज़र से बन्दे,

कोई नहीं बच पाता,

मेरे दाता के दरबार में.....

मेरे दाता के दरबार में,

सब लोगो का खाता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।