जग जननी तूं सबदी पालनहार है

पारंपरिक
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग जननी तूं सबदी पालनहार है

शेएर : चारे युग प्रताप मां तेरा, तेरे कई अवतार,

वेद पुराणां पर ना पाया, महिमा अपरम्पार |

संता भक्तां दी महाराणी, तीन लोक सरकार,

दास 'मधुप' तेरे गुण गावे, बोले जय जयकार ||

धुनः काली कमली वाला मेरा यार जैसी धुन

जग जननी तूं सबदी पालनहार है ईह सारा संसार तेरा परिवार है ||

तूं ही साडी जीवन जिंदगी,

आरती पूजा भजन बंदगी |

मां तू ही इस जीवन दा आधार है ||

ईह सारा संसार.......

दुख दरिद्र दोष मां हारना,

अवगुण साडे चित ना धरना |

तूं ही करना भव सागर तों पार है ||

ईह सारा संसार.......

अपनी कृपा आप मां करना,

दे मुरादां झोलियां भरना |

दास 'मधुप' तेरे चरणां तों बलिहार है ||

ईह सारा संसार.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।