आजा मैं तो भटक गया राह में...

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां सबको सद्बुद्धि दो,बड़े शांति सदभाव।

मिटे शीघ्र संसार से, घृणा द्वेष का भाव।।

आजा मैं तो भटक गया राह में,मुझको दिखादे तेरा द्वार।

मुझको दिखादे तेरा द्वार.

(1) बन न सका मैं पत्थर भी तेरी राह का मैया।

मुझको सहारा है बस एक तेरी बांह का मैया।।

दरस दिखादे एक बार मां,

आजा मैं तो भटक गया राह में ...

(2)चूर हुआ मैं गर्व नशे में तेरा नाम मैं भुला।

जिसके लिए यह जन्म हुआ वही काम मैं भुला।

मिले ना जनम ये हर बार मां,

आजा मैं तो भटक गया राह में...

(3)कांटो पे तूने फूल बिछाकर पथ को साफ किया।

जानबूझकर कितनी की गलती फिर भी माफ किया।

तुझको नमन है सौ बार मां,

आजा मैं तो भटक गया राह में,मुझको दिखादे तेरा द्वार।

मां मां ....मां

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।