रूप धरे विकराल मैया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

स्थाई

रूप धरे विकराल मैया रूप धरे विकराल

जिनके आगे दानव भागे आ जाए भूचाल

रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा पहला

खड़ग त्रिशूल को लेकर , मन में क्रोध भयंकर

समर मे ऐसी गरजे , दानव कापे थर थर -2

पाप मिटाए जगत बचाए, दुनिया हुई खुशहाल

रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा दूसरा

रूप भयानक काला , पहने मुंड की माला

छोड़े मैया ज्वाला , पिये लहू का प्याला -2

शक्तिशाली ममता वाली , संकट देती टाल

रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा तीसरा

दानव दल को मिटाने , चली है मैया ठाने

लगी कटार चलाने , दुष्ट लगे घबराने -2

करो निरंजन माँ का वंदन , मैया बड़ी दयाल

रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

Lyrics - Niranjan sen ji

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।