डमरू बजाए भोलेनाथ गौरां मैया नाच रही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू वजाए भोले नाथ

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डमरू, वजाए, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

हो गौरा मईया, नाच रही,

हो गौरा मईया, नाच रही ।

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा ने पहनी, सोने की मुकुटी ॥

गंगा, बहाए, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहना, सोने का टीका ॥

चंदा, सजाए, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहनी, कुमकुम की बिंदिया ॥

भस्म, रमाए, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहनी, मोतियों की माला ॥

सर्पों, की माला, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहनी, रेशम की साड़ी ॥

बाघंबर, पहने, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहने, सोने के झुमके ॥

बिच्छुयों, के कुण्डल, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, ने पहनी, चाँदी की पायल ॥

घुंघरू, वजाए, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

गौरा, तो खाए, लड्डू पेड़े ॥

भाँग, धतूरा, भोले नाथ,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

भोले, के संग में, गौरा विराजे ॥

गोदी, में बैठे, गणराज,

गौरा मईया, नाच रही ॥

डमरू, वजाए, भोले नाथ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।