डाडैइया झुपत आबे ओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ll ला लाला ला लाला ला लाला लाला ला लाला ला लाला ll

डाडैइया झुपत आबे ओ...... बिलो नाचत आबे न ll

जय हो.... ला लाला लाला ला लाला ला

1 बारा गाँव पत्थर वाली रानी माई सिया देई ll

बारा भंवर धार वाली तेलिन शक्ति दांते वाली ll

कनिहा जोरत आबे ओ......बिलो नाचत आबे ना l

डाडैइया झुपत आबे ओ...... बिलो नाचत आबे न l

जय हो.......ला लाला ला लाला ला

2 राज वाली बस्तरहिन रायपुरहिन कंकालिन ll

जिला वाली कंकरहिन हिंगलागिन मटियारिन ll

कनिहा जोरत आबे ओ.... बिलो नाचत आबे ना l

डाडैइया झुपत आबे ओ...... बिलो नाचत आबे न l

जय हो.......ला लाला ला लाला ला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।