काली काली तू कलकत्ते वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली काली तु कलकत्ते वाली,

तेरी अखियां लाल लाल है

तेरे गल मुण्डन की माल है

तूने कहा था मैं जम्मू में मिलूंगी,

मैं आई तू न आई

मेरे प्यासे नैना तरसे, तू निकली न भवन से

काली काली.............,

तेरी अखियां.........

तेरे गल ................

तूने कहा था कलकत्ते में मिलूंगी

मैं आई तू न आई

मेरे प्यासे नैना तरसे तू नि

निकली न भवन से

काली काली...........,

तेरी अखियां.... ...........

तेरे गल...................

तुने कहा था नैना देवी में मिलूंगी

मैं आई तू न आई

मेरे प्यासे नैना तरसे, तू निकली न भवन से

काली काली...........,

तेरी अखियां.........

तेरे गल.....…...............

तुने कहा था मनसा देवी में मिलूंगी

में आई तू न आई

मेरे प्यासे नैना तरसे तू निकली न भवन से

काली काली...........,

तेरी अखियां.............

तेरे गल...........

तुने कहा था वै वैष्णो देवी में मिलूंगी

मैं आईतू न आई

मेरे प्यासे नैना तरसे तू निकली न भवन से

काली काली...........,

तेरी अखियां..........

तेरे गल..…...............

तुने कहा था चिन्तापूर्णी में मिलूंगी

मै आई तू न आई

मेरे प्यासे नेना तरसे तू निकली न भवन से

काली काली ............,

तेरी अखियां........

तेर गले..........

तुमम तूने कहा था ज्वाला देवी में मिलूंगी

मैं आई तून आई

मेरे प्यासे नैना तरसे तू निकली न भवन से

काली काली तू कलकत्ते वाली

तेरी अखियां लाल लाल है

रोटे गल मुण्डन के माल है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।