ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

मेरे घर आई मईया मंदिर को छोड़ के,

ब्रम्‍हा भी आए विष्णु भी आए,

लक्ष्मी भी आई मईया चुनरी को ओढ़ के,

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

राम भी आए लक्ष्मण भी आए,

सीता भी आई मईया चुनरी को ओढ़ के,

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

कृष्णा भी आए दाउ भी आए,

राधा भी आई मईया चुनरी को ओढ़ के,

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

शंकर भी आए गणपति भी आए,

गौरा भी आई मईया चुनरी को ओढ़ के,

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

दुर्गे भी आए मईया कैला भी आई,

नौ बहनें आई संग चुनरी को ओढ़ के,

ये गोटेदार चुनरी निकली माँ ओढ़ के,

श्रेणीदुर्गा भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।