लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ

लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ

धुल तेरे चरणों की लेकर माथे तिलक लगाया

हो, धुल तेरे चरणों की लेकर माथे तिलक लगाया

यही कामना लेकर, मैया, द्वार तेरे मैं आया

रहूँ मैं तेरा हो के, तेरी सेवा में खो के

सारा जीवन गुज़ारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ

सफल हुआ ये जनम कि मैं था जन्मों से कंगाल

हो, सफल हुआ ये जनम कि मैं था जन्मों से कंगाल

तूने भक्ति का धन दे के कर दिया मालामाल

रहें जब तक ये प्राण, करूँ तेरा ही ध्यान

नाम तेरा पुकारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ

लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।