जगदम्बे आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

—--------------आरती के बोल—-----------

ॐ जय जगदम्बे माँ , मईया जय जगदम्बे माँ

ममता मई , करुणा मई……….2

भक्तन शीतल छा

ॐ जय जगदम्बे माँ , मईया जय जगदम्बे माँ

ॐ जय जगदम्बे माँ , मईया जय जगदम्बे माँ

ममता मई , करुणा मई…………..2

भक्तन शीतल छा

ॐ जय जगदम्बे माँ , मईया जय जगदम्बे माँ

1 ) शैलपुत्री शाकुंभरी , सत्य सनातन माँ

सरला साम्भवी समता , सन्तन को धन माँ

ॐ जय जगदम्बे माँ

2 ) ब्रह्म विद्या ब्रह्म रूपा , ब्रह्म चारिणी है

भय हरणी भ्रम नासनी , तू भव तारिणी है

ॐ जय जगदम्बे माँ

3 ) चेतन चित प्रकाशनी , चन्द्र घण्टा माई

माया मुलाधारणी , मनसा सुख दाई

ॐ जय जगदम्बे माँ

4 ) कुष्मांडा कात्यायनी , जय स्कन्द माता

कालरात्रि कामाक्षा , कमला सुख दाता

ॐ जय जगदम्बे माँ

5 ) ज्ञाता ज्ञान गायत्री , ज्ञेय महा गौरी

गंगा गीता गोमयी , गोदा अति भोरी

ॐ जय जगदम्बे माँ

6 ) सकल सृष्टि संचालिनी , सर्व सिद्धि दात्री

परमेश्वरी पावनी , परा शक्ति मात्री

ॐ जय जगदम्बे माँ

7 ) आत्म अलख अगोचर , अविगत अविनाशी

अखण्ड अरूप अनामय , अम्बे सुखे राशी

ॐ जय जगदम्बे माँ

8 ) जगदम्बे की आरती , जो कोई गावे

भूलन भाव हो जैसा , तैसा फल पावे

ॐ जय जगदम्बे माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।