सद्गुरु के वचन को भुलाया न कर

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

लाख बाधायें हों चाहे गम की घटा,

सद्गुरु के वचन को भुलाया न कर ।

हाथ में ज्ञान दीपक दिये सद्गुरु,

जिंदगी के दिए को बुझाया न कर ॥

लाख....

हिय में भक्ति के जो तेरे भाव हैं,

सद्‌गुरु के कृपा का प्रभाव है ।

छोड़‌कर तोड़कर सारे बंधन न डर,

जब हृदय में तेरे प्रेग गंगा भरी,

जग की बातों से दिल को जलाया न कर ॥

लाख....

सद्‌गुरु का वचन तेरे साथ है,

चलना वचनों पे तेरे हाथ है ।

तू तो चल छोड़ छल सद्‌गुरु की डगर,

राह सत की तू चल दूर मंजिल नही,

कष्ट विपदा से तू घबराया न कर ।।

लाख....

कहना गम को न दुनिया से भूलकर,

दुनियावालों से आँसू को दूर कर ।

कर भजन हो मगन जग की आशा न कर,

जितना रोना तुझे रो ले भगवान से,

कान्त दुनिया को आँसू दिखाया न कर ।

लाख....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।