गुरुदेव शरण में आया हूँ ,निज दास समझ अपना लेना

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गुरुदेव शरण में आया हूँ,

निज दास समझ अपना लेना ।

मैं नीच-अधम-अज्ञानी हूँ,

गुरु ज्ञान की ज्योति जला देना ।।

१.अपराधी हूँ अपराध किया,

ना जाने कितने पाप किया ।

मैं सेवक हूँ गुरु स्वामी हो,

मेरे पापों को दफना देना ।।

गुरुदेव...

२.नादान हूँ मैं नादानी से,

भक्ति के भाव को क्या जानूँ ?

गुरुदेव कृपा के सागर हो,

भक्ति का ज्ञान करा देना ।।

गुरुदेव...

३.यदि ईश रूठ जायेगा तो,

गुरुदेव ही एक सहारा हो ।

गुरु रूठ न जाना गलती से,

निज सेवक जान दया करना।।

गुरुदेव...

४.मुझमें है बहुत बुराई पर,

गुरुदेव शरण में आया हूँ ।

अपराध हुई जो कान्त से हो,

निज शिष्य समझ समझा देना ।।

गुरुदेव...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।