तू जितनी भी चाहे दौलत कमा ले

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॥ पावन पाठ ॥

तू जितनी भी चाहे दौलत कमा ले

माँ बाप से बढकर कोई धन नहीं है

बचपन से जिसने चलना सिखाया

पढा के लिखा के काबिल बनाया

वो बूढे हुए जो अकेले हुए वो

उन्हे साथ रखने का तेरा मन नहीं है

जन्म के तुझे है जिस माँ ने पाला

बडा होके उसका तू छीने निवाला

रखा कोख में था नौ माह जिसने

उसी माँ को रखने का तेरा मन नहीं है

तू जितनी भी चाहे दौलत कमा ले

माँ बाप से बढकर कोई धन नहीं है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।