सत्संग दा नजारा दो घड़ियां

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सत्संग दा नजारा दो घड़ियां

ऐ नां के मिलना दोबारा दो घड़ियां

पीलो अमृत प्याला दो घड़ियां

ऐ घड़ियां बड़ियां सवंलियां ने

जित्थे संगता आन खडियां ने

भगतां दा नजारा दो घड़ियां

सत्संग में समझो दीवाली ऐ

जित्थे जगदी जोत निराली ऐ

कर लो और मन उजयाला दो घड़ियां

सत्संग विच हनुमत आंदे ने

राम नाम दी अलग जगांदे ने

लै लो राम दा नजारा दो घड़ियां

सत्संग विच गंगा बगदी ऐ

जित्थे पापां दी बेड़ी डुबदी ऐ

कर लो पापां तो किनारा दो घड़ियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।