मोदक पे मोदक खाए गयो रे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मोदक पे मोदक खाए गयो रे

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धुन- भक्तों को दर्शन दे गई रे

मोदक, पे मोदक, खाए गयो रे,

माँ, गौरा का लाला ॥

गौरा का, लाला माँ, गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

मैंने पूछा, बालक से, नाम तेरा, क्या है ।

हंस हंस, गणपति, बताए गयो रे,

माँ, गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

मैंने पूछा, बालक से, माता पिता कौन है, ।

शिव, गौरा, बताए गयो रे,

माँ, गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

मैंने पूछा, बालक से, रहता कहाँ है ।

कैलाश, पर्बत, बताए गयो रे,

माँ गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

मैंने पूछा, बालक से, वाहन तेरा क्या है ।

मूषक, की सवारी, बताए गयो रे,

माँ, गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

मैंने पूछा, बालक से, भोग तेरा क्या है ।

लड्डू, मोदक, बताए गयो रे,

माँ, गौरा का लाला ।

मोदक, पे मोदक...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।