ज़रा सामने तो आओ श्याम जी मेरी नईया, पड़ी मझधार है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन- ज़रा, सामने तो आओ छलिए

ज़रा, सामने तो, आओ श्याम जी,

मेरी नईया, पड़ी मझधार है,

आज, रो रो, पुकारे मेरी आत्मा,

एक तूँ ही, मेरा आधार है ॥

ज़रा, सामने तो, आओ श्याम जी...

तेरे बिन मैं, पार प्रभु जी,

भव से, कभी नहीं हो सकती ।

तेरे बिना मैं, इस जीवन में,

सुख से, कभी न सो सकती ॥

तेरे हाथों में, मेरी पतवार है,

एक तूँ ही, मेरा रखवार है,

आज रो रो, पुकारे...

डगमग डगमग, नाव ये मेरी,

कभी इधर, कभी उधर हिले ।

तेरी होवे, कृपा की नज़र तो,

भव सागर, से पार लगे ॥

अब तूँ ही, मेरी सरकार है,

इस दिल को, अब तेरा इंतजार है,

आज रो रो, पुकारे...

गीता में जो, वचन दिया था,

उस को, प्रभु जी, याद करो ।

राधा सखी की, बीच भँवर से,

आ कर, नईया, पार करो ॥

इन नयनों में, आँसुओं की धार है,

तन मन धन, तुझ पे न्योछार है,

आज रो रो, पुकारे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।