हृदय आनंन्द भर बोलो,बधाई है बधाई है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हृदय आनन्द भर बोलो,बधा‌ई है बधा‌ई है

हमारे भाग्य हैं जागे,जो ‘लाली’ घर में आ‌ई

है

हृदय आनंन्द भर बोलो बधाई है बधाई है

हृदय....

1.धन्य वृषभानुपुर सुन्दर,धन्य वृषभानु नृप

मन्दिर

धन्य वह कक्ष मंगलकर,अजन्मा जहाँ

आ‌ई है

हृदय आनंन्द‌ भर बोलो,बधाई है बधाई है

हृदय....

2.शुभ सित पक्ष भादौं मास,शुभ अति

अष्टमी सुख रास,

शुभ नक्षत्र अभिजित खास, जिन में राधा

जा‌ई है

हृदय आनंन्द भर बोलो,बधाई है बधाई

हृदय....

3.काम की कालिमा हर कर, प्रेम की छबि

प्रकाशित कर,

रस-सुधा से विषय-विष हर,प्रेम की बाढ़

छा‌ई है हृदय आनंन्द‌भर बोलो‌,बधाई है

बधाई है

हृदय....

4.खोलकर नेह के झरने,सुखी निज श्याम

को करने,

हृदय आनन्द से भरने,स्वयं श्यामा जु

आ‌ई है

हृदय आनन्द भर बोलो,बधाई है बधाई

है

हदय....

5.हृदय है यह कन्हैया की,प्राण है यह

कन्हैया की,

आत्मा यह कन्हैया की,सुधा बरसाती

आ‌ई है

हृदय आनन्द भर बोलो,बधाई है बधाई

है

हृदय....

6.एक ही दो बने हैं जो,दो रहकर एक ही हैं

सो

रसा स्वादन कराने को,रस की सरिता

आ‌ई है

हृदय आनन्द भर बोलो,बधाई है बधाई

है

हृदय....

7.पुकारो भानु नृप की जय,मैया कीर्ति की

जय

हु‌आ दम्पति का भाग्योदय,जिन की

कन्या कहा‌ई है हृदय आनन्द भर

बोलो,बधाई है बधाई है

हृदय....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।