मंदिर से दौड़ी चली आऊंगी कोई दिल से पुकारे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर से दौड़ी चली आऊंगी कोई दिल से पुकारे,

पहला संदेसा मेरे राम का आया ,

रामा का आया धनुषधारी का आया,

सीता का रूप धर आऊंगी कोई दिल से पुकारे....

दूजा संदेसा मेरे विष्णु का आया,

विष्णु जी का आया चक्करधारी का आया,

लष्मी का रूप धार आऊंगी कोई दिल से पुकारे.....

तीजा संदेसा मेरे भोले का आया,

भोले का आया मेरे शंकर का आया,

गोरा का रूप धार आउंगी कोई दिल से पुकारे.......

जब भी संदेसा मेरे भक्तो का आया,

भक्तो का आया मेरे सेवक का आया,

दुर्गा का रूप धार आउंगी कोई दिल से पुकारे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।