श्री राधा बनीं कोतवाल कन्हैया बड़े चोर निकले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री राधा बनीं कोतवाल कन्हैया बड़े चोर निकले

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श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े, चोर निकले ॥

चोर निकले, बड़े चोर निकले ॥

कन्हैया, बड़े चोर निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

हुक्म, हुआ, राधेरानी का, चोर न रहने पाए ।

जो कोई चोरी, करता हो पकड़ा, सभा बीच में आए ॥

गस्त, चहुँ ओर निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

घुसे, एक, गुजरी के घर में, ग्वाल सहित गोपाल ।

मिला ना माखन, बैठे-बैठे, बीती सारी रात ॥

हुआ जब, भोर निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

पेंदा, फोड़, दिया मटकी का, बही दूध की धार ।

बारी-बारी, लगा के चुल्लू, पिएं बाल गोपाल ॥

मटुकिया, फोड़ निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

इतने, गोरस, बेच के गुज़री, लौटी अपने धाम ।

ग्वाल-बाल, छुप गए तुरंत ही, पकड़े गए घनश्याम ॥

चले ना, कछु ज़ोर निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

चली, आम, दरबार गुजरिया, ले कान्हा को साथ ।

राह में उसके, ही स्वामी का, पकड़ा करके हाथ ॥

श्याम इक्क, ओर निकले...

श्री राधा, बनीं कोतवाल, कन्हैया बड़े...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।