गौरी के पुत्र गणेश जी मेरे घर में पधारो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

( सदा भवानी दाहिने, सन्मुख रहे गणेश ।

पाँच देव रक्षा करें, ब्रह्मा विष्णु महेश ॥ )

गौरी के, पुत्र गणेश जी,

मेरे घर में पधारो ॥

घर में पधारो, कीर्तन में पधारो ॥

काटो, सकल कलेश जी,

मेरे घर में पधारो ।

गौरी के, पुत्र गणेश जी...

एकदन्त दयावन्त, चार भुजा धारी ।

चार भुजा धारी बाबा, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूस की सवारी ।

मूस की सवारी बाबा, मूस की सवारी ।

हे ! सर्व सिद्धि, सर्वेश जी,

मेरे घर में पधारो...

गोरी के, पुत्र गणेश जी...

मोदक प्रिय मुद, मंगल दाता ।

मंगल दाता बाबा, मंगल दाता ।

विद्या वारिधि, बुद्धि विधाता ।

बुद्धि विधाता बाबा, बुद्धि विधाता ।

हे ! गणपति, पुत्र उमेश जी,

मेरे घर में पधारो...

गोरी के, पुत्र गणेश जी...

शंकर सुवन, भवानी के नंदन ।

भवानी के नंदन बाबा भवानी के नंदन ।

चरण कमल पे, शत शत वंदन ।

शत शत वंदन बाबा, शत शत वंदन ।

मेरे, हृदय, करो प्रवेश जी,

मेरे घर में पधारो...

गोरी के, पुत्र गणेश जी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।