जी हथ जोड़ गुरां नू मेरी वंदना

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गुरुदेव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जी हथ जोड़ गुरां नू मेरी वंदना

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जी हथ, जोड़ गुरां नू, मेरी वंदना ॥

एक बार वंदना, हज़ार बार वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू, मेरी वंदना ॥

गणपति जी नू वंदना, रिद्धि सिद्धि जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

माता जी नू वंदना, शेर जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

श्याम जी नू वंदना, राधा जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

भोले जी नू वंदना, गौरां जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

ब्रह्मा जी नू वंदना, ब्रह्माणी जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

राम जी नू वंदना, सीता जी नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

भगतां नू वंदना, जी संगतां नू वंदना ॥

जी हथ, जोड़ गुरां नू...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।