मत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछतायेगा

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मत बुरे कर्म कर बन्दे, वरना पछताएगा।

भगवान की नजर से, ना बच पाएगा।

अरे ओ प्राणी, मत कर नादानी।।

जब जाएगा तू बन्दे, यम के दरबार में।

ना बने हिमाती तेरा, कोई संसार में।

ये कुटुम्ब कबीला तेरा, ना तुझे बचाएगा।।

जिस के लिये करता है, तू छल और बेईमानी।

कोई नहीं है तेरा, ये बात न पहचानी।

अपने कर्मों का फल तू, खुद ही पाएगा।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।