॥ पावन पाठ ॥
मेरे प्राणों के आधार हे परमेश्वर
मेरे जीवन के सुख सार हे जगदीश्वर
दूर मन से तेरी दुनियां की माया हो
मोह ममता में उलझे ना ऐ मन मेरा
तेरी करूणा कृपा की छाया हो
तन है नश्वर जगत हे विधाता पिता
राह प्रतिपल दिखाना हे परमात्मा
मन है व्याकुल कहीं सांस रुक जाए ना
तुम ही रक्षक हो पालक मेरे देवता
मोह ममता में उलझे ना ऐ मन मेरा
मेरे प्राणों के आधार हे परमेश्वर
मेरे जीवन के सुख सार हे जगदीश्वर