जेहड़ा ताड़ियाँ वजावे ओह्दी लगे हाज़री

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

जेहडा़ ताडियां बजावे

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जेहडा़, ताडियां बजावे, ओहदी, लगे हाजिरी ll

लगे हाजिरी, ओ बहनों, लगे हाजिरी ll

जेहडा़, ताडियां बजावे, ओहदी, लगे हाजिरी ll

हाथ में गड़वा, गंगा जल पानी ll

ओ जेहडा़, चरण धुलावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, सत्संग आवे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हाथ कटोरी, केसर रोली ll

ओ जेहडा़, तिलक लगावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

ओ जेहडा़, नच के दिखावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हाथ में करणी, फुलां नाल भरनी ll

ओ जेहडा़, हार पहनावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

ओ जेहडा़, भजन सुनावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हाथ में थाली, जोतां वाली ll

ओ जेहडा़, आरती उतारे, ओहदी, लगे हाजिरी l

ओ जेहडा़, भूल बक्शावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हाथ में थाली, मेवे मखना वाली ll

ओ जेहडा़, भोग लगावें ओहदी, लगे हाजिरी l

ओ जेहडा़, फुल बरसावे ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

हाथ में थाली, पैसेयां वाली ll

ओ जेहडा़, अरदास करावे, ओहदी, लगे हाजिरी l

ओ जेहडा़, दौड़ा दौड़ा आवे, ओहदी, लगे हाजिरी l

जेहडा़, ताडियां बजावे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।