सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

दर्शन मैया दा भागा वाला ही पाँदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा.....

हर पल जो जगंदम्बे माँ दी याद विच डुबया रहंदा,

जय माता दी जय माता दी कहंदा ऊठदा बैंदा,

उसदे नाम दी मस्ती दे विच डुबके गोते खांदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा.....

जिसने अपना आप लुटाया उसने माँ नु पाया,

उसनु दाती दे आचँल दी मिल गई शीतल छाया,

माँ दे चरणां दी धुली नु जो मत्थे दे लाँदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा....

उसदे सुपने विच आऊंदी मैया शेर सवारी,

खुलीयां अँखा नाल उसने माँ दी छवी निहारी,

भगत झण्डेयावाली दे हदय विच वसांदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा....

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

दर्शन मैया दा भागा वाला ही पाँदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा,

सुपना दाती दा किसे किसे नु आऊंदा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।