रामलला के दुआरे चलिये

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रामलला के दुआरे चलिये, मुखों बोलते जयकारे चलिए -2

जिन्हें राम जी से प्यार - चले चलो हो जाओ तैयार ।

चलो मिलजुल के सारे चलिए, मुखों बोलते जयकारे चलिए ।।

कई सौ वर्षों बाद बना है, राम का महल सुहाना ।

देखकर जिसको तन मन झूमें, दिल हो जाए दीवाना ।।

हुए कितने कुर्बान - कितनों ने दे दी है जान ।

इस दिन को दिखाने के लिए, उनकी यादें संजो के रखिए ।।

रामलला के दुआरे चलिए, मुखों बोलते जयकारे चलिए ।

सबरी जैसी करी प्रतीक्षा, देखो रामभक्त ने ।

वीरों ने पर हार न मान, फिर भी बुरे वक्त में ।।

हुए रामलला प्रसन्न - आकर दिए दर्शन ।

सबके कष्ट मिटाने के लिए, अपना प्रेम लूटाने के लिए ।

रामलला के दुआरे चलिए, मुखों बोलते जयकारे चलिए ।

प्राण प्रतिष्ठा पर ही राम ने, चमत्कार दिखलाया ।

ऐसा बदला रूप प्रभु ने, मूर्तिकार चकराया ।।

बोला मेरी नहीं औकात - प्रभु स्वयं बने साक्षात ।

मेरा मान बढ़ाने के लिए, चरणों से लगाने के लिए ।।

रामलला के दुआरे चलिए, मुखो बोलते जयकार चलिए ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।