माया का मारीच चला मायापाती को भटकाने

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कंचन मृग बनकर आया

कंचन मृग बनकर आया सिय का अपहरण कराने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

कंचन मृग बनकर आया

कंचन मृग बनकर आया सिय का अपहरण कराने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

सीता बोलीं वो देखें स्वामी है मृग कंचन का

लायें चर्म निशान रहेगा चौदह बरस गमन का

सीता बोलीं वो देखें स्वामी है मृग कंचन का

लायें चर्म निशान रहेगा चौदह बरस गमन का

सिय माया की माया का मृग

सिय माया की माया का मृग लगे राम मुसकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया सोना है इसके आगें यह जगत खिलौना

कितने लोगों को जीवन भर सोने दिया न सोना

माया सोना है इसके आगें यह जगत खिलौना

कितने लोगों को जीवन भर सोने दिया न सोना

राम चले सोने के पीछे हम सब को समझाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

मायापति को भी वन में इतना दौड़ाई माया

इसी लिए जीवन में कही पड़े न माया की कही छाया

मायापति को भी वन में इतना दौड़ाई माया

इसी लिए जीवन में कही पड़े न माया की कही छाया

रही नचा रहा जो जग को उसे माया चली नचाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

कंचन मृग बनकर आया

कंचन मृग बनकर आया सिय का अपहरण कराने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

माया का मारीच चला मायापति को भटकाने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।