रथडो धीमे धीमे हाको संवारा वृंदावन ले चाल

सुखदेव जी भारती।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वृंदावन ले चाल सांवरा,

मण्डफीया में ले चाल,

रथड़ो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

रथडो मारो रंग रंगीलो,

पहीया चकरी दार,

बेठण वाली राधिका जी,

हांके नंद जी रो लाल,

रथडो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

वृंदावन की कुंज गली में,

कानो रास रचाय,

खेलन वाली राधिका जी,

देखें नंद जी रो लाल,

रथडो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

वृंदावन रा पहाड़ में,

बेठो कालों नाग,

राधा जी के गला लीपटगयो,

छुड़ावें नंद जी रो लाल,

रथडो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

चांद सरीखा चांवल रादीयां,

सोना सरीखी की दाल,

रादन वाली राधिका जी,

जीमे नंद जी रो लाल,

रथडो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

चन्द्र सखी री वीनती रे,

सुणजो सीरजनहार,

शरणे आया री लाज राखजो,

रखो नंद जी रा लाल,

रथडो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

वृंदावन ले चाल सांवरा,

मण्डफीया में ले चाल,

रथड़ो धिमे धिमे हांको,

सांवरा वृंदावन ले चाल ।।

गायक - सुखदेव जी भारती।

प्रेषक - प्रदीप मेहता झाडोल।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।