नीम की ठंडी छाव में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नीम की ठंडी छाव में बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो,

रूप है उसमे कितने समाये,

ईश्वर अल्लाह वो कहलाये,

साई के रंग रंग जाऊ बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो,

द्वार पे उनके जो भी जाये,

मन वांछित फल पाकर आये,

चरण धूल कब पाउ बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो,

वो तो दया के सागर भगवन,

उनकी भक्ति सबसे पावन,

भक्ति में रम जाऊ बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो,

मन का पंछी व्याकुल बोले,

साई सुमिरले साई का होले,

साई नाम रस पाउ बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो,

नीम की ठंडी छाव में बैठे मेरे साई,

नीम है शिरडी गाँव में बैठे मेरे साई,

भक्तो दर्शन करलो, भक्तो दर्शन करलो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।