मुझे श्याम सुन्दर की दुल्हन बना दो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे श्याम सुन्दर की दुल्हन बना दो

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( ऐसे वर को, क्या वरू,

जो जनमे, और मर जाये l

वरीये, गिरिधर लाल को,

चुड़लो, अमर होई जाये ॥ )

आओ, मेरी सखियो, मुझे मेहँदी लगा दो l

मेहँदी, लगा दो मुझे, सुन्दर सजा दो ll

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

सतसंग, मे मेरी, बात चलाई l

सतगुरु, ने मेरी, कीनी सगाई ll

उनको, बुला के, हथ लेवा तो करा दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

ऐसी, पहनूँ चूड़ी जो, कबहूँ ना टूटे l

ऐसा वरु, दूल्हा जो, कबहूँ ना छूटे ll

अचल, सुहाग की, यह बिंदिया लगा दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

ऐसी, ओढ़ूँ चुन्नरी जो, रंग नहीं छूटे l

प्रीत, का धागा, कबहूँ न टूटे ll

आज, मेरी मोतियों से, मांग भरा दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

प्रीत, की पायल पहन, नाच नाच गाऊँगी l

अविनाशी, प्रीतम से, वियाह मैं रचाऊँगी

मुझे, मेरे मोहन से, कोई तो मिला दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

भक्ति, का सुरमा मैं, आँख में लगाऊँगी l

दुनियाँ, से नाता तोड़, उनकी हो जाऊँगी ll

सतगुरु, बुला के मेरे, फेरे तो डला दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो l

बाँध, के घुंघरू मै, उनको रीझाऊँगी l

ले के, इकतारा मै, श्याम-श्याम गाऊँगी ll

सतगुरु, बुला के मुझे, बिदा तो करा दो ll,

मुझे, श्याम सुन्दर की, दुल्हन बना दो l

मुझे, मेरे मोहन की, दुल्हन बना दो ll

आओ, मेरी सखियो*,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।