आई रे आई रे अष्टम भादो की आई,प्रगट भये हैं आज शाम लला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आई रे आई रे अष्टम भादो की आई,

प्रगट भये हैं आज शाम लला

आई रे आई रे रात भादो की आई,

प्रगट भये हैं आज शाम लला

1.बृज़ मण्डल में खुशियां है आई,

देव गणों नें पुष्प वर्षा बरसाई

आ ही गयो आज नन्दं को आनंन्द,

यशोदा मैया को सब दैवें बधाई

आई रे आई रे अष्टम भादो की आई,

प्रगट भये हैं आज शाम लला

आई रे आई रे रात भादो की आई,

प्रगट भये हैं आज शाम लला

आई रे आई रे....

2.नन्दं भवन में आनंन्द छायो,श्रुत्तियों नें भी

महिमा है गाई

ढोल नगाड़े बाजंन लागे,कैसी अद्धबुत

महिमा है भाई

आई रे आई रे....

3.सत्तर गज्ज की पगड़ी बान्धें,डोलत फिरत

है नंदबाबा

पागल धसका झुंम-झुंम के,गाये रहें हैं यही

भजंन

‌‌(नंद के आंनन्द भयो,जय कन्हैया लाल की)

(हाथी दिनें घोड़ा दिनें,ओर दिनें पालकी)

पागल धसका झुंम-झुंम के,गाये रहे हैं यही

भजंन

आई रे आई रे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।