रोये रोये पाती रुक्मणि बिटिया लिख रही जी

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोये रोये पाती रुक्मणि बिटिया लिख रही जी

ऐजी जाके नैनन हाँजी जाके नैनन, बरसत नीर

व्याह रचावे भैया शिशुपाल से जी

ऐजी मेरो प्यार दुश्मन है गयो जी,

रोये रोये पाती रुक्मणि बिटिया लिख रही जी

आएके खबरिया जल्दी मेरी लीजियो जी

ऐजी कोई नन्द सुवन यदुवीर

रोये रोये पाती रुक्मणि बिटिया लिख रही जी

जो नही आओ जल्दी मेरे साँवरे जी

ऐजी अपने प्राणन को करूंगी में अखीर

रोये रोये पाती रुक्मणि बिटिया लिख रही जी

मधुर स्वर - धर्माचार्य पूज्य श्री अशोक कृष्ण ठाकुर जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।