मेरे गुण अवगुण को पलड़े में न तोलो तो अच्छा होगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुण अवगुण को पलड़े में,

न तोलो तो अच्छा होगा

मेरे सिर पे गगरिया पापो की-2

न खोलो तो अच्छा होगा

मेरे गुण अवगुण..............

कितने वादे करके हे भगवन-2

पाया तुझसे मानव का तन-2

मैने वो निभाए है के नही-2

न वोलो तो अच्छा होगा-2

मेरे गुण अवगुण............

मेरे पापो का मेरे पुण्यो का-2

अच्छे या बुरे सब कर्मो का -2

है तेरे पास हिसाव मगर-2

न जोड़ो तो अच्छा होगा-2

मेरे गुण अवगुण.......….....

न सेवा की न पूजा की-2

फिर भी तुमसे है आस लगी-2

छोड़ो ये झूटा भटम सही -2

न तोड़ो तो अच्छा होगा-2

मेरे गुण अवगुण को पलड़े में,

न तोलो तो अच्छा है

मेरे सर पे गगरिया पापो की ,

न खोलो तो अच्छा है

मेरे गुण अगगुण....…….......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।