ओ राधे काहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

-------------भजन के बोल-------------------

ओ राधे कहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

कन्हिया क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

राधे काहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

कन्हिया क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

1 ) तेरी मेरी प्रीत पुरानी , कहे रार करे वृजरानी

कान्हा का तने मन मे ठानी , उलटी बात करे मनमानी

राधिके कर मेरी पहचान , ना मोते फिर शरमावेगी

कन्हैयाँ क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

2 ) तेरा बरसाने क्या काम , चला जा उलटा तू नंदगाँव

तू राधा में तेरो श्याम , मिटाएले प्यारी भ्रम तमाम

रही ना तेरी अखियन में लाज की दुनियाँ बात बनावे गी

राधे कहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

3 ) प्रेम की बात तोये समझाऊँ मुरलिया तेरे लिए बजाऊँ

में बातन में ना ही आऊँ जल भर के अपने घर जाऊँ

मैं मार्ग रोक खड़ा हो जाऊँ किशोरी कैसे जावेगी

कन्हिया क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

4 ) छेड़े काहे मोहे मुरारी मोते दूर हटो बनवारी

प्रेम की भिक्षा दे दो प्यारी दुभिदा खत्म करो अब सारी

ओ भूलन त्यागी हरि की लीला सब की वाणी गावेगी

ओ राधे काहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

बच ना पावेगी ओ राधे बच ना पावेगी

राधे काहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

कन्हैयाँ क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

राधे काहे नैन चुरावे मोते बच ना पावेगी

कन्हैयाँ क्यों ज्यादा इतरावे आफत तोपे आवेगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।