खाटू की रज को समझो ना बालू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू की रज को बावरे,समझो ना बालू रेत 2

जाने कितने प्रेमियो ने 2 खुद की चढ़ाई भेट

खाटू...

जो भी लगाये माथे से,कटते उसके कलेश

कन कन मे खाटू रज के, बस्ते खाटू नरेश ] 2

जपने से श्याम नाम के,दर्शन से मात्र श्याम के

बन गये है कितने सेठ

खाटू...

खाटू की रज से प्रेमियो,जुडा हुआ इतिहास

कितने ही भक्तौ ने यहाँ,अन्तिम ली है साँस ] 2

आरती जैसे भगतो ने,ना जाने कितने भक्तौ ने

चढाया खुद को है भेट

खाटू...

जब जब भी जाओ खाटू,थोडा करना ध्यान

चले गये जो श्याम शरण,करना उन्हे प्रणाम ] 2

माथे पे रज लगाने मे,महिमा को संजय गाने मे

होना नही कभी तू लेट

खाटू...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।