महाकाल जपते जपते, दौड़ा चला मैं आऊं,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महाकाल जपते जपते, दौड़ा चला मैं आऊं,

दिल की सुनाऊं तुमको, किस्मत मेरी संवारूं।

आया हूं तेरे दर पर दुखड़े सभी मिटा दे,

एक आस है तुझी से बिगड़ी मेरी बना दे,

तेरे भरोसे बैठा खाली कभी ना जाऊं,

महाकाल जपते जपते, दौड़ा चला मैं आऊं ।

हमने सुना है बाबा लाखों को तुमने तारा,

भूलों को माफ करके कितनों को है उबारा,

मैं भी शरण पड़ा हूं, किरपा तेरी मैं चाहूं,

महाकाल जपते जपते, दौड़ा चला मैं आऊं

दिल की सुनी है मेरी बिगड़ी बनी है मेरी,

दर पे तुम्हारे आकर, झोली भरी है मेरी,

तुम जैसा कोई जग में, दाता नहीं मैं पाऊं ,

महाकाल जपते जपते, दौड़ा चला मैं आऊं ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।