कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ

बजावे भोले नाथ , बजावे भोले नाथ

ऊँचे पर्वत डमरू बजावे भोले नाथ

कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ

1 ) जब भोले का डमरू बाजे , शिव गण नाचे सारे

धरती और अंबर गूँजे , सब बोल रहे जयकारे

सुनलो नई-नई ताल , सुनावे भोले नाथ

कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ…………2

2 ) जल्दी प्रसन्न होने वाले , हैं भोले भंडारी

बजा बजा के डमरु काटे , इस जग की बीमारी

विष पी के संसार को , हर्षावे भोले नाथ

कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ…………2

3 ) शिव की माया ऐसी जिसको , कोई जान ना पाया

उसको भी अपना लेते ये , जो जग ने ठुकराया

भूलन से बालक को भी , अपना वे भोले नाथ

कैलाश ऊपर डमरू बजावे भोले नाथ…………2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।