आपके दर का हु नौकर, शंकर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नही पता कौन हु मैं, और कहां मुझे जाना हैं

शिव ही मेरी मंजिल है, और शिव का दर ही ठिकाना हैं

आपके दर का हु नौकर, शंकर

आपके दर का हु नौकर, शंकर

आपके दर का हु नौकर शंकर

आपका हाथ हैं , आपका हाथ हैं

आपका हाथ है सिर पर, शंकर

आपके बच्चों का गुलाम हु मैं

मुझको किस बात का हैं डर, शंकर

सारे दीवाने बांधे बैठे हैं

इक तेरा नाम ही सिर पर, शंकर

शिव शंकर भजमन हरे हरे

भज शंकर भजमन हरे हरे

आपसे मांगू आप ही दोगे

तेरा दीवाना है ज़िद पर, शंकर

सबको मुंह मांगा वर देते हो

आगया जो तेरे दर पर, शंकर

शिव शंकर के दर जो आया मुंह मांगा वो फल पाया हैं

उसको मिला है जी भर कर जो खाली झोली लाया हैं

तू अपनी बिगड़ी किस्मत को बाबा के दर पर लाके देख

जो बिगड़ी बना दे सब भक्तों की महादेव कहलाते हैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।