पितरजी म्हारे आँगनिये में

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॥ पावन पाठ ॥

पेंडे घण्टी डाल के,सथियो दिन्यो मांड

रोली चावल चिरच के,दियो दियो जलाय

पितरजी म्हारे आंगनिये मे आओ म्हारा राज

दुंद.दुदालो पूज कर,थारो ध्यान लगाय

थै हो कुल का देवता,थारो सम्मान करा

पितरजी म्हारे आँगनिये.......

आज बडो ही चाव चढ़्यो, म्हारे मन के माय

खाटू वालो आयसी, इ प्रांगण के माय

पितरजी म्हारे आँगनिये...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।