मां ने सबनु दिता कदे खाली नइयो मोड़या

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मां ने सब नु दिता, कदे खाली नईयो मोड़या

मां ने सब नु दिता................

पूरी किती आशा सब दी, दिल नइयो तोड़ेया

मां ने सब नु दिता........

ऐहो मईया , अन्नपूर्णा सब न देवन वाली

विश्वदी मालिक वैष्णो रानी, दाती पोली पाली

ऐसी कल्याणी वरदानी दा में दर है लोड़या

मां ने सब दिता....................

पूरी किती...............................

पर पर चेलिया वन्डी जादे नई पण्डारे मुकदे

मेहर करे मेहरा वाली दे सागर नइ जे मुकदे

भव सागर चो तारेया सबसे पापा नु है रोड़ेया

मां ने सबनु दिता........................

पूरी कीती आशा......................

महारानी दी रीत अनोखी खेल भी ओदे निराले

देन वाली मां अकदी नइयो थक जान मंगन वाले

तर गया तारन वाली दे नल नाता जिस ने जोड़ेया

मां ने सब नु दिता.......................

पूरी किति आशा........................

में मूरख मइया गुण तेरे दसा केड़े केड़े

उसनु गल लाया जेड़ा आया तेरे बेड़े

जोश जेहे पापी नु भी मईया नहीं मोड़ेया

मां ने सबनु दिता कदे खाली नइदी मोड़ेया

पूरी किती आशा सबदी दिल नई तोडेया

मां ने सब नु दिता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।